फोन आया तो करना होगा जवाब
नए निर्देश के मुताबिक, किसी सांसद या विधायक का फोन आने पर अधिकारी को उसे रिसीव करने की कोशिश करनी होगी। यदि किसी जरूरी कार्य में व्यस्त होने के कारण कॉल नहीं उठ पाता है, तो अधिकारी को काम पूरा होते ही खुद वापस फोन करना होगा। इसका उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद को बेहतर और तेज बनाना है।
पत्र मिलने पर देनी होगी जानकारी
सांसद या विधायक की ओर से किसी मामले को लेकर पत्र भेजे जाने पर भी अधिकारियों को सक्रियता दिखानी होगी। पत्र प्राप्त होने की जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधि को दी जाएगी। इसके बाद मामले में क्या कार्रवाई हुई और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी जानकारी निर्धारित समय के भीतर लिखित रूप में देनी होगी।
दफ्तर पहुंचने पर प्रोटोकॉल का ध्यान
यदि कोई सांसद या विधायक किसी काम से अधिकारी के कार्यालय पहुंचता है तो उसके पद के अनुरूप सम्मान और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। सरकार का मानना है कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इन अधिकारियों को करना होगा पालन
ये निर्देश पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारियों पर भी लागू होंगे। सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस कदम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय कायम करना है, ताकि जनता से जुड़े मामलों पर समय पर सुनवाई और कार्रवाई हो सके।
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