सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक
विभाग ने सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। सरकारी भूखंड पर कब्जा करने, उसकी बिक्री करने या अवैध तरीके से इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य सरकारी भूमि को सुरक्षित रखना और जरूरत के अनुसार उसका जनहित में इस्तेमाल करना है।
इन जमीनों को माना जाता है सरकारी
गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, बकास्त, खासमहाल, कैसर-ए-हिंद और असर्वेक्षित भूमि जैसी श्रेणियों की जमीन को सरकारी भूमि माना जाता है। जमीन पर सरकार का प्रत्यक्ष कब्जा हो या नहीं, रिकॉर्ड के आधार पर ऐसी भूमि सरकारी संपत्ति की श्रेणी में आ सकती है। सरकार जरूरत के अनुसार ऐसी जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए कर सकती है।
31 लाख से ज्यादा सरकारी प्लाट चिह्नित
राज्य में अब तक 31 लाख 51 हजार 19 सरकारी प्लाट की पहचान की गई है। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 17.86 लाख एकड़ से अधिक बताया गया है। विभाग ने सभी जिलों को सरकारी जमीन का सत्यापन पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। गया में सबसे ज्यादा करीब 2.90 लाख सरकारी प्लाट चिह्नित किए गए हैं। इसके बाद मधुबनी में करीब 2.43 लाख, दरभंगा में 1.81 लाख, नालंदा में 1.61 लाख, नवादा में 1.57 लाख और पटना में करीब 1.46 लाख सरकारी प्लाट दर्ज किए गए हैं।
सत्यापन के बाद होगी आगे की कार्रवाई
राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में सरकारी प्लाट का सत्यापन किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान ऐसे भूखंड भी सामने आए हैं, जिन्हें रिकॉर्ड और जांच के आधार पर खारिज किया गया। सरकार का जोर अब सरकारी भूमि का सही रिकॉर्ड तैयार करने के साथ उस पर हुए अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने पर है। इससे भविष्य में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और कब्जे पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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