पहले पद के हिसाब से मिलता था अलग भत्ता
पुरानी व्यवस्था के तहत सहायक लोको पायलट को 60 रुपये, पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट को 90 रुपये और मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट को अधिकतम 120 रुपये प्रति माह टार्च सेल भत्ते के तौर पर मिलते थे। रेल कर्मचारियों का कहना था कि ड्यूटी के दौरान टार्च की जरूरत और उपयोगिता लगभग समान होने के बावजूद भत्ते में इतना अंतर उचित नहीं है। इसी वजह से यह मुद्दा लंबे समय से कर्मचारी संगठन की ओर से उठाया जा रहा था।
यूनियन ने लगातार उठाई मांग
एनई रेलवे मेंस कांग्रेस ने टार्च सेल भत्ते में समानता का मुद्दा रेलवे प्रशासन के सामने रखा। संगठन की ओर से पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक उदय बोडवरकर के साथ हुई पीएनएम बैठक में भी इस मांग को प्रमुखता से रखा गया। कर्मचारी संगठन का तर्क था कि समान प्रकृति के काम के लिए टार्च का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग दर से भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। लगातार बातचीत के बाद रेलवे प्रशासन ने इस मांग पर सकारात्मक फैसला लिया।
अब हर महीने 320 रुपये मिलेंगे
नई व्यवस्था के तहत संबंधित लोको पायलटों को अब 320 रुपये प्रतिमाह टार्च सेल भत्ता मिलेगा। इससे पुराने और नए भुगतान के बीच का अंतर काफी कम होगा और कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक राहत मिलेगी। कर्मचारी संगठन ने रेलवे प्रशासन के इस निर्णय को अपनी मांग की बड़ी सफलता बताया है।

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