पहले चरण में वैशाली, बोधगया, राजगीर, नालंदा, पावापुरी, केसरिया और भागलपुर में इसके लिए जगह चिह्नित की गई है। इन केंद्रों को प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास विकसित करने की योजना है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक सीधे स्थानीय उत्पाद खरीद सकें।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार
इन हाट मार्ट में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री, पारंपरिक वस्तुओं और स्थानीय कला से जुड़े उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इससे पर्यटकों को बिहार की ग्रामीण संस्कृति और उत्पादों से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
सरकार की योजना इन केंद्रों को सामान्य बाजार की तरह नहीं, बल्कि आधुनिक और वातानुकूलित अनुभव केंद्र के रूप में विकसित करने की है। यहां उत्पादों के साथ उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया और महिला समूहों की सफलता की कहानियां भी प्रदर्शित की जा सकती हैं।
पर्यटन और महिला रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
बोधगया, राजगीर, नालंदा और पावापुरी जैसे स्थानों पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। वहीं केसरिया बौद्ध पर्यटन से जुड़ा प्रमुख स्थल है और भागलपुर रेशम व हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में इन जगहों पर हाट मार्ट बनने से स्थानीय उत्पादों को व्यापक ग्राहक मिल सकते हैं।
प्रति हाट मार्ट करीब 5 से 7 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र से भी सहयोग लेने की तैयारी में है। पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग बेहतर होने से उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इस पहल से जीविका दीदियों की कमाई बढ़ाने के साथ उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है।
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