इन प्लांटों में नगर निकायों से निकलने वाले गीले और जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा। कचरे के प्रसंस्करण से सीबीजी तैयार होगी, जिससे एक तरफ शहरों में कचरा प्रबंधन बेहतर होगा, वहीं दूसरी ओर कचरे से ऊर्जा बनाने को बढ़ावा मिलेगा।
25 साल तक कंपनियां करेंगी संचालन
योजना के तहत तेल एवं गैस कंपनियों के साथ 25 वर्षों का समझौता किया जाएगा। नगर निकाय प्लांट के लिए जमीन, अलग किया हुआ जैविक कचरा और संपर्क मार्ग उपलब्ध कराएंगे। पानी, बिजली, सीवेज और जल निकासी जैसी जरूरी सुविधाएं भी स्थानीय निकाय उपलब्ध कराएंगे।
वहीं प्लांट लगाने और उसके संचालन में होने वाला खर्च संबंधित तेल एवं गैस कंपनियां उठाएंगी। प्लांट से तैयार गैस और अन्य उत्पादों की बिक्री एवं उपयोग की जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी।
25 साल बाद नगर निकायों को मिलेगा अधिकार
समझौते की अवधि पूरी होने के बाद प्लांट का संचालन और रखरखाव नगर निकायों के अधिकार में आ जाएगा। इसके साथ ही प्लांट से होने वाली आय पर भी स्थानीय निकायों का अधिकार होगा।
सरकार की इस पहल से शहरों में गीले कचरे के निस्तारण की समस्या कम होने की उम्मीद है। साथ ही कचरे को ऊर्जा और आर्थिक संसाधन में बदलकर वेस्ट-टू-वेल्थ की अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा।
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