बिहार सरकार का फैसला, जमीन मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी!

पटना। बिहार में प्रस्तावित सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने जमीन मालिकों की सहमति को प्राथमिकता देने की तैयारी की है। जमीन देने को लेकर किसानों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने भूमि प्राप्त करने के कई विकल्प तैयार किए हैं।

लैंड पुलिंग में मिलेगा 55 फीसदी हिस्सा

भूमि लेने के विकल्पों में लैंड पुलिंग को प्रमुखता दी गई है। इस व्यवस्था के तहत किसानों से ली गई जमीन को विकसित करने के बाद उसका 55 प्रतिशत हिस्सा वापस जमीन मालिकों को देने का प्रस्ताव है। यानी जमीन मालिकों को सिर्फ जमीन देने के बदले विकसित क्षेत्र में हिस्सा मिल सकता है। इससे किसानों को भविष्य में अपनी जमीन की बढ़ी हुई कीमत का लाभ मिलने की संभावना रहेगी।

दूसरा विकल्प भी तैयार

यदि कोई जमीन मालिक लैंड पुलिंग के लिए तैयार नहीं होता है तो सरकार के पास दूसरा विकल्प भी रहेगा। इसके तहत जमीन मालिकों को एफएआर और टीडीआर जैसे लाभ देने के साथ कुछ शुल्क में राहत देने पर विचार किया जा सकता है। सड़क, नाला, पार्क और सीवरेज जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन की जरूरत पड़ने पर खरीद की प्रक्रिया अपनाने का विकल्प भी रखा गया है।

सहमति नहीं बनी तो अधिग्रहण पर विचार

अगर किसी क्षेत्र में जमीन मालिक जमीन देने के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण का विकल्प भी मौजूद रहेगा। हालांकि विभाग का जोर पहले आपसी सहमति से जमीन उपलब्ध कराने पर है। इसके अलावा हाइब्रिड मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है। इसमें किसी एक सेक्टर के किसान जिस व्यवस्था पर अधिक सहमत होंगे, उसी मॉडल के अनुसार भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

गांव-गांव जाकर किसानों से होगी बातचीत

पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप से जुड़े हितधारकों की बैठक में भूमि प्राप्त करने के इन विकल्पों की जानकारी दी गई है। अब विभाग किसानों के बीच जाकर उन्हें अलग-अलग व्यवस्थाओं, उनके फायदे और प्रक्रिया के बारे में बताएगा।

सरकार का स्पष्ट रुख है कि किसी जमीन मालिक की इच्छा के खिलाफ जमीन लेने की कोशिश नहीं की जाएगी और सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर किसानों की आशंकाएं कम करने की कोशिश की जा रही है।

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