भारत-रूस का कारोबार 2024 में करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह रहा। हालांकि 2025 में प्रतिबंधों के कारण व्यापार प्रभावित हुआ, लेकिन 2026 की पहली छमाही में फिर तेजी देखने को मिली।
आपको बता दें की इस भुगतान व्यवस्था में रूस के 22 और भारत के 17 बैंक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 90 फीसदी लेन-देन 10 मिनट के भीतर पूरे हो जाते हैं, जबकि आधे से ज्यादा भुगतान एक मिनट से भी कम समय में निपट रहे हैं।
अब दोनों देश कारोबार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। तेल के अलावा भारत रूस से कोयला, खाद और अन्य उत्पाद खरीदता है, जबकि रूस को भारत मशीनरी, दवाएं, रसायन और कृषि उत्पाद भेजता है।

0 comments:
Post a Comment