1. आशा और ममता कार्यकर्ताओं का बढ़ा मानदेय
स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और ममता कार्यकर्ताओं के लिए नीतीश सरकार ने मानदेय में तीन गुना तक बढ़ोतरी कर दी है। अब आशा कार्यकर्ताओं को 1000 की जगह 3000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 600 रुपये मिलेंगे, जो पहले 300 रुपये थे। इससे एक लाख से ज्यादा आशा कार्यकर्ताओं और हजारों ममता कार्यकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
2. महिलाओं को सरकारी नौकरी में 35% आरक्षण
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नीतीश सरकार ने राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की घोषणा की है। इस फैसले से शिक्षा, पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का एक नया अवसर मिलेगा।
3. युवाओं को 5 साल में 1 करोड़ रोजगार
बिहार सरकार का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देना है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है, जो रोजगार के नए अवसरों की पहचान कर सरकार को सलाह देगी। यह फैसला राज्य में बेरोजगारी की समस्या को कम करने और युवा वर्ग को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
4. युवाओं के लिए सशुल्क इंटर्नशिप योजना
नीतीश सरकार ने युवाओं को नौकरी से पहले अनुभव और आर्थिक मदद देने के उद्देश्य से एक इंटर्नशिप योजना शुरू की है। 18 से 28 वर्ष के बीच के युवाओं को 4 से 6 हजार रुपये प्रतिमाह की इंटर्नशिप दी जाएगी। यह योजना न केवल युवाओं को आर्थिक सहारा देगी बल्कि उन्हें व्यावसायिक कौशल से भी लैस करेगी।
5. ‘दीदी की रसोई’ योजना में सस्ती थाली
ग्रामीण और जरूरतमंद वर्ग के लिए शुरू की गई ‘दीदी की रसोई’ योजना में अब महज 20 रुपये में भरपेट भोजन मिलेगा, जो पहले 40 रुपये था। यह कदम खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में एक बड़ी राहत लेकर आया है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना बाहर काम करते हैं और सस्ता भोजन ढूंढते हैं।
6. बिजली और परिवहन पर राहत योजनाएं
बिहार सरकार ने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने का ऐलान किया है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही, राज्य में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई बस खरीदने पर 20 लाख रुपये की सहायता देने की योजना भी लागू की गई है। ये फैसले बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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