उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत मखाना की उन्नत किस्मों स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल मखाना उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों को तकनीकी सहयोग और उपकरणों की भी सुविधा मिलेगी।
16 जिलों में होगी योजना की शुरुआत
कृषि विभाग का लक्ष्य है कि योजना के तहत कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिलों में मखाना की खेती का क्षेत्र विस्तार किया जाए। इस योजना के अंतर्गत किसानों को उन्नत बीज दिए जाएंगे और परंपरागत उपकरण किट जैसे औका, गांज, कारा, खैंचि, चटाई आदि प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, बीज उत्पादन और वितरण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
किसानों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
मखाना खेती की इकाई लागत 97,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है, जिसमें बीज, उर्वरक और कटाई की लागत शामिल है। सरकार इस पर 75% यानी 72,750 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता दो किस्तों में किसानों को देगी। योजना के तहत केवल डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पोर्टल पर पंजीकृत नए किसानों को ही लाभ मिलेगा, जो पहली बार खेत प्रणाली से मखाना की खेती शुरू करेंगे। परंपरागत उपकरण किट की कीमत 22,100 रुपये तय की गई है, जिस पर भी 75% यानी 16,575 रुपये का अनुदान मिलेगा।
महिलाओं को भी मिलेगा विशेष अवसर
योजना में 30% भागीदारी महिला कृषकों की भी सुनिश्चित की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने का मार्ग भी खुलेगा। मखाना की खेती पारंपरिक रूप से बिहार के कुछ जिलों में की जाती रही है, लेकिन अब सरकार की इस पहल से इसे वैज्ञानिक और व्यवसायिक रूप मिलेगा।
.png)
0 comments:
Post a Comment