युद्ध के नए युग में AI की दस्तक, ये 4 देश बना रहे लड़ाकू मशीनें

न्यूज डेस्क: एक समय था जब युद्ध केवल सैनिकों, बंदूकों और टैंकों का खेल था। लेकिन अब, वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीतियों की दिशा बदल चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युद्ध के मैदान में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। अमेरिका, चीन, रूस और इज़राइल जैसे देश भविष्य की लड़ाइयों को जीतने के लिए इंसानों से ज्यादा मशीनों और कोड्स पर दांव लगा रहे हैं।

जहां एक ओर युद्ध का पारंपरिक स्वरूप पीछे छूट रहा है, वहीं दूसरी ओर ड्रोन, ऑटोनोमस वेपन्स, साइबर सिस्टम और इंटेलिजेंट डिफेंस नेटवर्क्स के ज़रिए अब जंग लड़ी और जीती जा रही है। ये तकनीकें न केवल मानव क्षति को कम कर रही हैं, बल्कि दुश्मन की रणनीति को पलभर में ध्वस्त करने की क्षमता भी रखती हैं।

1. अमेरिका: AI सैन्य क्रांति में आगे

अमेरिका ने युद्ध तकनीक में अपनी बढ़त को बरकरार रखते हुए Pentagon के "Joint Artificial Intelligence Center (JAIC)" के माध्यम से AI को सेना के हर अंग में शामिल कर दिया है। फाइटर जेट्स से लेकर निगरानी ड्रोन तक, हर सिस्टम अब डाटा और एल्गोरिदम के जरिए फैसले लेने में सक्षम हो चुका है। Project Maven जैसे मिशन युद्ध के दौरान रियल-टाइम वीडियो एनालिसिस कर, दुश्मन की गतिविधियों को तुरंत पहचानते हैं।

2. चीन: AI से अगली पीढ़ी की सेना

चीन ने युद्ध तकनीक में AI को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है। ‘AI + War’ की रणनीति पर काम करते हुए पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) फेशियल रिकग्निशन, सैटेलाइट इमेज एनालिसिस और रोबोटिक यूनिट्स का इस्तेमाल युद्ध में करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। चीन का लक्ष्य है "स्मार्ट वॉरफेयर" को हकीकत में बदलना, जिसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित हो।

3. रूस: घातक AI हथियारों का गढ़

रूस ने AI को साइबर युद्ध और ऑटोनोमस हथियारों में प्रमुख रूप से अपनाया है। रूसी सेना ने हाल ही में कई AI संचालित टैंक और रोबोट सोल्जर्स का परीक्षण किया है। साथ ही, रूस की साइबर यूनिट्स AI की मदद से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सैटेलाइट जामिंग और कम्युनिकेशन इंटरसेप्शन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। रूस का दावा है कि AI से युक्त हथियार जल्द ही मानवीय हस्तक्षेप के बिना लड़ने में सक्षम होंगे।

4. इज़राइल: स्मार्ट डिफेंस का पर्याय

इज़राइल AI तकनीक से अपने डिफेंस को और अधिक स्मार्ट और रिएक्टिव बना रहा है। इज़राइली सेना ड्रोन युद्ध और Predictive Targeting Systems में AI का उपयोग कर रही है, जो पहले से ही आतंकवाद विरोधी अभियानों में सफलता दिला चुके हैं। यह देश तेजी से साइबर-डिफेंस, इंटेलिजेंस एनालिटिक्स और स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी की ओर बढ़ रहा है।

AI से युद्ध का चेहरा बदलता हुआ

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में युद्ध में “कौन ज्यादा ताकतवर है” से ज्यादा यह मायने रखेगा कि “कौन ज्यादा स्मार्ट है”। AI के जरिए सेनाएं दुश्मन की हरकतों को पहले से पढ़ सकती हैं, और उससे पहले हमला कर सकती हैं। हालांकि, इसके खतरे भी कम नहीं हैं। ऑटोनोमस हथियारों की नैतिकता, मानव नियंत्रण से बाहर युद्ध की स्थिति और AI हैकिंग जैसी चुनौतियां सामने हैं, जिन पर अभी भी वैश्विक सहमति नहीं बन सकी है।

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