8वें वेतन आयोग: ₹44,900 बेसिक-पे वालों की नई सैलरी?

नई दिल्ली। भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग (Pay Commission) एक महत्वपूर्ण पहल होती है, जो हर दशक में सरकारी वेतन संरचना को नए सिरे से परिभाषित करती है। वर्तमान में देश में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुई थीं। अब चर्चा 8वें वेतन आयोग की हो रही है, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसमें कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी?

फिटमेंट फैक्टर: सैलरी बढ़ोतरी का मूल आधार

आपको बता दें की भारत में किसी भी वेतन आयोग की आत्मा उसका फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) होता है। यह एक गुणांक (Multiplier) है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा किया जाता है और नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिसकी वजह से न्यूनतम वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। अब अगर 8वें वेतन आयोग की बात करें, तो विभिन्न रिपोर्ट्स में फिटमेंट फैक्टर को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं, कुछ जगह यह 1.92, तो कहीं 2.86 तक बताया गया है। हालांकि, वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय अनुशासन को देखते हुए 1.92 फिटमेंट फैक्टर को सबसे यथार्थवादी और संभावित माना जा रहा है।

₹44,900 बेसिक पे की नई सैलरी: संभावित अनुमान

यदि आप Level 7 के सरकारी कर्मचारी हैं और आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी ₹44,900 है, तो 1.92 फिटमेंट फैक्टर के अनुसार आपकी नई बेसिक सैलरी होगी: ₹44,900 × 1.92 = ₹86,208 (नई संभावित बेसिक सैलरी), अब अगर हम इसी के आधार पर सकल वेतन (Gross Salary) का आकलन करें, तो उसमें महंगाई भत्ता (DA), एचआरए (HRA), टीए (TA) आदि जोड़े जाते है, तो नेट सैलरी में भारी वृद्धि होगी। 

8वें वेतन आयोग पर अब तक क्या हुआ है?

अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से संकेत मिलते रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग पर मंथन चल रहा है। कर्मचारी संगठनों ने इसकी मांग तेज कर दी है और कई बार ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। यह भी उम्मीद की जा रही है कि 2026 के आसपास यह आयोग लागू हो सकता है, जैसा कि पिछले दो आयोगों (6वें और 7वें) के बीच का अंतराल रहा है।

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