तीन मोर्चों पर भारत की दहाड़, अमेरिका-चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत अब सिर्फ उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि वैश्विक मंच पर एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में भारत ने तीन ऐसे प्रमुख क्षेत्रों स्पेस, डिफेंस और इकोनॉमी में ऐसी छलांग लगाई है, जिससे अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियां भी चौंक गई हैं। यह प्रगति न सिर्फ भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी एक नई दिशा दे रही है।

1. स्पेस: अंतरिक्ष में भारत का परचम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बीते कुछ सालों में दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है। चंद्रयान-3 की सफलता और आदित्य-एल1 मिशन के बाद, अब भारत की नजरें मंगल और शुक्र मिशनों पर हैं। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले मिशन लॉन्च कर भारत ने एक नई ‘स्पेस इकोनॉमी’ का द्वार खोला है।

जहाँ अमेरिका और चीन अरबों डॉलर खर्च कर अंतरिक्ष में दबदबा कायम रखने की होड़ में हैं, वहीं भारत ने विज्ञान, तकनीक और बजट प्रबंधन का ऐसा संतुलन बनाया है, जो एक रोल मॉडल बन चुका है। भारत अब वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट लॉन्च सर्विसेज का बड़ा केंद्र बन रहा है।

2. डिफेंस: आयात से आत्मनिर्भरता की ओर

डिफेंस क्षेत्र में भारत की नीति अब 'आयातक' से 'निर्यातक' बनने की ओर अग्रसर है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित लड़ाकू विमान तेजस, अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें, और आधुनिक युद्धपोत इस बदलाव के प्रतीक हैं। 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत भारत ने अब तक 400 से अधिक रक्षा उपकरणों के निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

हाल ही में भारत ने फ्रांस, अमेरिका और रूस के साथ कई सामरिक समझौते किए हैं, लेकिन साथ ही अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाया है। यह न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी भी बना रहा है।

3. इकोनॉमी: 5 ट्रिलियन की ओर बढ़ता भारत

भारतीय अर्थव्यवस्था आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। IMF और World Bank दोनों ने भारत की GDP वृद्धि दर को 6.5% से ऊपर बनाए रखने का अनुमान जताया है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसे कार्यक्रमों ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

वहीं, चीन की अर्थव्यवस्था जहां रियल एस्टेट संकट और डिमांड स्लोडाउन से जूझ रही है, भारत ने अपनी घरेलू खपत और युवाशक्ति के बल पर स्थिर और मजबूत वृद्धि दिखाई है। भारत अब न केवल सर्विस सेक्टर में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीटेक और ग्रीन एनर्जी में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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