बीमा लाभ की पहली मिसाल: महिला सिपाही कोमल
इस नई योजना का पहला लाभ, महिला सिपाही कोमल के परिजनों को मिला। कुछ महीने पहले पटना के अटल पथ पर वाहन चेकिंग के दौरान एक तेज रफ्तार वाहन ने कोमल को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल कोमल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनके परिवार को ₹1.5 करोड़ का बीमा लाभ दिया गया, साथ ही ₹20 लाख की अतिरिक्त सहायता राशि भी दी गई, जिससे कुल ₹1.7 करोड़ की मदद उन्हें मिली।
अन्य कल्याणकारी योजनाएं भी सक्रिय
एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) डॉ. कमल किशोर सिंह के अनुसार, सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुग्रह राशि, नौकरी और अन्य सुविधाओं के अलावा विभाग स्तर पर भी कई कल्याणकारी कोष बनाए गए हैं। इनमें परोपकारी कोष, शिक्षा कोष और स्वास्थ्य कोष शामिल हैं।
परोपकारी कोष से इस वर्ष 53 पुलिसकर्मियों को कुल ₹6.84 लाख की सहायता दी गई है। शिक्षा कोष को अब पीजी स्तर तक विस्तारित कर दिया गया है, जिससे पुलिसकर्मियों के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। पुलिस सहायता कल्याण कोष से असमय मृत्यु के मामलों में सालाना ₹24,000 की सहायता दी जाती है। इस साल 83 परिवारों को ₹32 लाख की राशि प्रदान की गई।
अनुकंपा नियुक्ति भी जारी
सरकार द्वारा अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था भी सक्रिय है। मोतिहारी की घटना इसका उदाहरण है, जहां 2009 में ट्रैफिक सिपाही मारगेट हंसदा की मृत्यु के बाद उनकी बेटी को नौकरी दी गई। इस तरह की योजनाएं न केवल पुलिसकर्मियों के परिवारों को सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि सेवा में जुटे जवानों का मनोबल भी बढ़ाती हैं।
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