इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि अब भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को भी महिलाओं की तरह स्टांप शुल्क में विशेष छूट का लाभ मिलेगा। यह निर्णय समाज के उन वर्गों के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से उपेक्षित महसूस करते रहे हैं। अब उन्हें भी अपनी मेहनत की कमाई से संपत्ति खरीदते समय सरकार की ओर से सहयोग मिलेगा।
महिलाओं के बाद अब विशेष वर्गों को भी लाभ
अब तक स्टांप शुल्क में छूट का लाभ केवल महिलाओं को सीमित सीमा तक मिलता था। पहले महिलाओं को 10 लाख रुपये तक की संपत्ति पर ही छूट थी, लेकिन हाल ही में इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपये तक किया गया है। इसी तर्ज पर अब भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगजनों को भी समान लाभ देने का निर्देश दिया गया है। इससे न केवल उनके स्वाभिमान को बल मिलेगा, बल्कि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।
रेंट एग्रीमेंट पर भी राहत देने के निर्देश
सरकार ने किरायेदारी को बढ़ावा देने और किरायेदारों की सहूलियत के लिए रेंट एग्रीमेंट पर लगने वाले स्टांप शुल्क में भी छूट देने का निर्णय लिया है। लघु और मध्यम वर्ग के किरायेदारों को अब स्टांप शुल्क के बोझ से राहत मिलेगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार, यदि वार्षिक किराया दो लाख रुपये तक है तो मात्र 500 रुपये, और यदि पांच लाख तक है तो सिर्फ 1000 रुपये में स्टांप शुल्क चुकाया जा सकेगा। इससे छोटे व्यापारी, स्टार्टअप्स और मध्यम वर्गीय परिवारों को काफी लाभ होगा।
ई-भुगतान और आधार से पारदर्शिता
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता और 20 हजार रुपये से अधिक के पंजीकरण शुल्क के लिए ई-भुगतान को जरूरी बनाया गया है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी।
इसके अलावा, जिन संपत्तियों का आवंटन विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है, उनके लिए 'सिंगल विंडो ई-पंजीकरण' की सुविधा लागू की जा रही है। इससे आम नागरिकों को लंबी कतारों और दलालों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी।

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