चीन की परेड में रूस-उत्तर कोरिया, पाकिस्तान भी मौजूद!

न्यूज डेस्क। 3 सितंबर 2025 को बीजिंग के तियानआनमेन स्क्वायर पर एक ऐतिहासिक दृश्य दुनिया के सामने आने वाला है, जो केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस भव्य सैन्य परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और मेज़बान देश चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ मंच साझा करेंगे।

तीन नेताओं की मौजूदगी: संयोग नहीं, संकेत है

पुतिन, किम और शी तीनों ही नेता अपने-अपने देशों में सत्ता की मज़बूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। इनकी विचारधारा और पश्चिमी देशों के प्रति आलोचनात्मक रुख इस बात का संकेत देता है कि बीजिंग में एक नया 'भूराजनैतिक गठजोड़' आकार ले रहा है। पुतिन जहां यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों से घिरे हैं, वहीं किम जोंग उन लगातार परमाणु परीक्षणों और अमेरिका विरोधी रुख के कारण अंतरराष्ट्रीय मंच से अलग-थलग हैं। शी जिनपिंग खुद को एक नए वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जो अमेरिका-यूरोप की अगुआई वाली विश्व व्यवस्था को संतुलित करना चाहते हैं।

पाकिस्तान की भागीदारी और भारत की अनुपस्थिति

इस आयोजन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति भी भारत के लिए एक कूटनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो जल्द ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन के लिए चीन पहुंचेंगे, इस परेड में हिस्सा नहीं लेंगे।

दुनिया में एक नया वैश्विक समीकरण बनता दिख रहा

बीजिंग की यह परेड केवल सैन्य पराक्रम का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन देशों की एकजुटता का इशारा है जो वर्तमान वैश्विक व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। जहां पश्चिम लोकतंत्र और मानवाधिकारों के आधार पर वैश्विक नैतिकता का दावा करता है, वहीं चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसी ताकतें इसे 'पश्चिमी हस्तक्षेप' मानती हैं और एक वैकल्पिक धुरी बनाने की कोशिश में हैं।

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