भारत के समर्थन में फिर उतरा रूस, अमेरिका रह गया दंग!

नई दिल्ली। एक ऐसे समय में जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में खटास देखी जा रही है, रूस ने एक बार फिर अपने पुराने मित्र भारत के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है। यह समर्थन सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। रूस के उप राजदूत रोमन बाबुश्किन ने हाल ही में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका भारत के निर्यात पर टैरिफ की दीवार खड़ी कर रहा है, तो रूस अपने बाजार भारत के लिए खोलने को तैयार है।

अमेरिकी दबाव के बावजूद मजबूत रूस-भारत ऊर्जा संबंध

अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगातार दबाव बनाया गया है, विशेष रूप से पिछले दो से तीन वर्षों में। लेकिन भारत ने जहां अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी, वहीं रूस ने भी भरोसेमंद साझेदार की तरह भारत को सस्ती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराना जारी रखा। बाबुश्किन ने बताया कि रूस भारत को औसतन 5-7% कम दर पर क्रूड सप्लाई करता है, जो भारत के ऊर्जा बजट के लिहाज से बेहद फायदेमंद सौदा है।

टैरिफ जंग: भारत के खिलाफ अमेरिका की सख्ती

अमेरिका की ट्रंप-प्रशासनिक नीतियों के चलते भारत के निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ उत्पादों पर तो 50% तक टैरिफ लगाए गए हैं, जिससे भारत के व्यापार संतुलन पर सीधा असर पड़ा है। ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव कि वह भारत के निर्यात का स्वागत करने को तैयार है, भारत के लिए एक आर्थिक संजीवनी की तरह है।

अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में बदलाव

रूस द्वारा बार-बार भारत का समर्थन करना यह संकेत देता है कि वैश्विक राजनीति में नई ध्रुवीयता बन रही है। पश्चिमी देशों की आलोचना पर बाबुश्किन की टिप्पणी, "अगर पश्चिम आपकी आलोचना कर रहा है, तो इसका मतलब है कि आप कुछ सही कर रहे हैं" गहरी रणनीतिक सोच को दर्शाती है। भारत के लिए यह वक्त उस सामरिक स्वतंत्रता को परिभाषित करने का है, जिसे वह ‘बहुध्रुवीय विश्व’ की नीति के तहत आगे बढ़ा रहा है।

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