भारत का ‘सूर्य’ VHF रडार: स्टील्थ विमानों के लिए नई चुनौती

नई दिल्ली: भारत ने अपनी वायु सुरक्षा में एक बड़ी छलांग लगाई है। अब देश की स्वदेशी ‘सूर्य’ VHF रडार प्रणाली स्टील्थ विमानों को पकड़ने में सक्षम हो गई है। यह तकनीक भारतीय रक्षा क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों की बराबरी करती नजर आ रही है। दुश्मन के सबसे घातक और अदृश्य माने जाने वाले स्टील्थ जेट्स के लिए यह रडार सिस्टम बड़ी चुनौती बन सकता है।

क्या है ‘सूर्य’ VHF रडार?

‘सूर्य’ VHF रडार एक ऐसी उन्नत तकनीक है जो पारंपरिक रडार से अलग, स्टील्थ विमान जैसे “अदृश्य” उपकरणों को भी पकड़ने की क्षमता रखती है। यह रडार अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADTL) द्वारा विकसित किया गया है और इसे भारतीय वायु रक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसकी मदद से दुश्मन के किसी भी घातक हवाई हमले को जल्दी पकड़ा जा सकता है।

IACCS प्रणाली ने दिखाया दम

भारतीय वायुसेना का ‘इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम’ (IACCS) भी स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने में सक्षम है। इसका असर हाल ही में तब देखने को मिला, जब केरल में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी F-35B जेट को IACCS ने कुछ ही सेकंड में पकड़ लिया। यह घटना इस प्रणाली की सटीकता और तेजी को दर्शाती है, जो भारत की वायु सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है।

B-2 बॉम्बर भी अब सुरक्षित नहीं

दुनिया का सबसे एडवांस्ड और ‘अदृश्य’ माना जाने वाला अमेरिकी B-2 स्टील्थ बॉम्बर भी अब पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा। रूस, चीन और भारत ने नई-नई एंटी-स्टील्थ तकनीक विकसित की है, जो इन अत्याधुनिक विमानों का पता लगा सकती है। इस तकनीकी उन्नति ने स्टील्थ विमान की परंपरागत सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है।

स्टील्थ विमानों की दौड़ और भारत की तैयारी

वर्तमान में अमेरिका, रूस और चीन ही ऐसे देशों में शामिल हैं जिनके पास अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट्स हैं। वहीं, भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। देश अपनी वायुसेना को और मजबूत बनाने के लिए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत भारत अपने खुद के स्टील्थ जेट विकसित करेगा। यह भारत की रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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