हाइपरसोनिक ताकत में भारत का उभार: टॉप 5 में बनाई जगह!

नई दिल्ली: हाइपरसोनिक मिसाइलें, जो आवाज़ की गति से पांच गुना या उससे भी अधिक तेज़ होती हैं, अब वैश्विक सैन्य शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। इन मिसाइलों की खासियत यह है कि ये उड़ान के दौरान अपनी दिशा और ऊंचाई बदल सकती हैं, जिससे इन्हें पकड़ना और रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस क्षेत्र में भारत ने भी अपनी जगह मजबूत कर ली है और विश्व की टॉप 5 हाइपरसोनिक मिसाइलों की सूची में शामिल हो गया है।

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या हैं?

हाइपरसोनिक मिसाइलें अत्यंत तेज़ होती हैं, जो प्रति सेकंड 1.5 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार से उड़ान भरती हैं। इन मिसाइलों की उड़ान केवल तेज नहीं होती, बल्कि वे उड़ान के दौरान दिशा और ऊंचाई भी बदलती हैं। इस वजह से पारंपरिक रडार और मिसाइल रक्षा प्रणाली इन्हें ट्रैक करने में नाकाम रहती हैं।

भारत का LRAShM: एक नई ताकत

भारत की विकसित की गई LRAShM (Long Range Advanced Surface-to-Surface Hypersonic Missile) मिसाइल इस श्रेणी में सबसे अहम हथियारों में से एक है। इसकी रफ्तार लगभग 11,113 किलोमीटर प्रति घंटे है और इसका रेंज 1500 किलोमीटर से अधिक है। इस मिसाइल की सटीकता और तेज़ी इसे दुश्मन के लिए गंभीर खतरा बनाती है।

दुनिया की अन्य प्रमुख हाइपरसोनिक मिसाइलें

रूस का अवांगार्ड: Mach 20 से Mach 27 की गति तक उड़ान भरने वाली यह मिसाइल 6,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर सकती है। यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और हवा में तेजी से दिशा बदल सकती है।

चीन की Dongfeng-17: Mach 10 की रफ्तार वाली यह मिसाइल 1,800 से 2,500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है।

अमेरिका का AGM-183 ARRW: B-52 जैसे विमान से लॉन्च होने वाली यह मिसाइल Mach 20 की गति तक पहुंचती है।

रूस की Kinzhal: MiG-31 जेट से लॉन्च होने वाली यह मिसाइल Mach 10 की गति से उड़ान भरती है और 2,000 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।

वैश्विक सैन्य संतुलन में भारत का नया अध्याय

हाइपरसोनिक मिसाइलों की तकनीक में भारत की प्रगति ने न केवल देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भी बदलाव की संभावना पैदा की है। इन मिसाइलों की अद्भुत गति और दिशा बदलने की क्षमता के कारण, भारत अब उन देशों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है जो इस क्षेत्र में पहले से अग्रणी थे।

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