कई जिलों को फायदा
करीब 45 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण से कुशीनगर और देवरिया के साथ-साथ बिहार के गोपालगंज और सिवान जिलों तक आवागमन आसान हो जाएगा। बेहतर सड़क सुविधा से न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि व्यापार और माल परिवहन को भी नई गति मिलेगी। सीमावर्ती इलाकों के व्यापारियों के लिए यह सड़क किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगी।
बाईपास-पुल परियोजना
इस परियोजना के तहत भागलपुर में करमौता–पंदह बाईपास का निर्माण भी प्रस्तावित है। करीब 45 मीटर चौड़े इस बाईपास से भारी वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना निकलने का रास्ता मिलेगा। इसके अलावा तुर्तीपार सेतु को भी फोरलेन करने की योजना है। मौजूदा दो लेन के पुल को चौड़ा किया जाएगा और पुराने पुल की मरम्मत कर उसे दोबारा उपयोगी बनाया जाएगा।
1.8 किलोमीटर लंबा नया सेतु
तुर्तीपार के पास पुराने पुल के बगल में नया सेतु बनाया जा रहा है, जिसकी लंबाई लगभग 1.8 किलोमीटर होगी। इस सेतु में कुल 40 पिलर बनाए जाएंगे, जिनमें से 10 पिलर नदी के भीतर होंगे। नदी में पिलर की खोदाई और नींव डालने का काम शुरू हो चुका है और निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आरओबी और 650 करोड़ का निवेश
एनएच 727-बी के चौड़ीकरण के दौरान उभांव और धानी ढाला पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) भी बनाए जाएंगे। पूरी परियोजना पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह निवेश न केवल सड़क सुविधा को बेहतर बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगा।

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