11 लाख से अधिक दीदियां अभी भी इंतजार में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 लाख से ज्यादा जीविका दीदियों के बैंक खातों में केवाईसी से जुड़ी समस्याओं के कारण राशि ट्रांसफर नहीं हो सकी है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी चंपारण जिला है, जहां एक लाख से ज्यादा महिलाओं का भुगतान अटका हुआ है। इसके अलावा मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और कटिहार जैसे जिलों में भी हजारों महिलाओं को अब तक सहायता नहीं मिल पाई है।
तकनीकी अड़चनें बनीं वजह
ग्रामीण विकास विभाग का कहना है कि भुगतान में देरी का मुख्य कारण अधूरी या गलत केवाईसी है। कई खातों में आधार लिंक नहीं है, कहीं नाम या जन्मतिथि में अंतर है, तो कहीं मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होने से समस्या खड़ी हो गई है। कुछ पुराने बैंक खाते निष्क्रिय हो चुके हैं, जिससे भी भुगतान प्रक्रिया बाधित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की सीमित पहुंच के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
सरकार का समाधान प्रयास
सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि विशेष अभियान चलाकर केवाईसी अपडेट कराई जाए। इसके लिए बैंक मित्रों, सीएसपी केंद्रों और जीविका कैडर को सक्रिय किया गया है। कई जिलों में विशेष कैंप लगाकर आधार सीडिंग, मोबाइल नंबर अपडेट और खाते के सत्यापन का काम शुरू हो चुका है, हालांकि प्रगति अभी अपेक्षा से धीमी मानी जा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह राशि समय पर महिलाओं तक पहुंच जाती, तो ग्रामीण इलाकों में नकदी प्रवाह बढ़ता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती। 10 हजार रुपये की यह सहायता कई परिवारों के लिए बीज, खाद, चारा, छोटे औजार या किराना दुकान जैसे कार्यों की शुरुआत का आधार बन सकती है।
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