बिहार में जमीन महंगी होने वाली, जानें नए भाव और बदलाव

पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में जमीन के दामों को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लंबे समय के बाद सर्किल दर बढ़ाने की तैयारी जोर पकड़ रही है। इस बदलाव का मुख्य मकसद यह है कि जमीन की वास्तविक बाजार कीमतों और सरकारी दरों में अंतर को कम किया जा सके।

सर्किल दर में बदलाव क्यों जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार सर्किल दर 2013 में तय की गई थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2016 में अपडेट हुई थी। तब से जमीन के दाम काफी बढ़ चुके हैं। आज कई जगहों पर खेती योग्य जमीन का बाजार भाव सरकारी दर से दोगुना तक हो गया है। वहीं, सड़कों के किनारे स्थित जमीन की कीमत चार से दस गुना तक बढ़ चुकी है।

नए नियम कैसे होंगे लागू

बिहार सरकार की योजना है कि शहरों और गांवों को जोड़ने वाली नई और चौड़ी सड़कों के किनारे की जमीन को कॉमर्शियल श्रेणी में रखा जाएगा। इसी तरह, आवासीय क्षेत्रों की जमीन को मुख्य सड़क और सहायक सड़क के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर नई न्यूनतम मूल्य दर (MVR) तय की जाएगी। प्रस्तावों की समीक्षा के बाद विभाग अंतिम मसौदा तैयार करेगा और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद यह लागू होगा।

आम लोगों को क्या फायदा होगा

सर्किल दर बढ़ने से आम जमीन मालिकों को अधिग्रहण के समय मुआवजा बाजार दर के करीब मिलेगा। इससे भूमि अधिग्रहण में होने वाली परेशानी और विवाद कम होंगे। इसके अलावा, सरकार के लिए भी विकास योजनाओं और सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाना आसान होगा, जिससे कई लंबित प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी।

जमीन खरीदने वालों को ध्यान देना होगा

आपको बता दें की जमीन की सर्किल दर बढ़ने का मतलब है कि जमीन खरीदने पर खर्च भी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा। स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क सर्किल दर के आधार पर तय होते हैं, इसलिए नई दरों के बाद रजिस्ट्री पर अतिरिक्त बोझ आएगा।

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