सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, बावजूद इसके कि दुनिया में कई तरह की चुनौतियाँ हैं जैसे अंतरराष्ट्रीय तनाव, पैसों की तंगी और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव। इसके बावजूद, निवेश में बढ़ोतरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उछाल ने भारत की आर्थिक रफ्तार को और तेज किया है।
भारत की ग्रोथ अमेरिका, चीन और जर्मनी से आगे
विशेष रूप से, सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत अब सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अमेरिका, चीन और जर्मनी के मुकाबले भारत की ग्रोथ दर तेज है। पिछले साल भारत ने जापान को भी पीछे छोड़ते हुए चौथा स्थान हासिल किया। 2026 की दूसरी तिमाही में भारत का GDP ग्रोथ 8.2% तक पहुंच गया, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे उच्च है। अप्रैल-जून की तिमाही का आंकड़ा 7.8% था, इसलिए यह और भी बढ़त को दर्शाता है।
साल दर साल बढ़ती रफ्तार
भारत की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने GST कटौती और निवेश प्रोत्साहन जैसे कदम उठाए। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर सकती है। RBI ने 2025 में ब्याज दरों में कटौती की, जिससे लोन लेना आसान हुआ और मांग में वृद्धि हुई। वर्ल्ड बैंक और IMF भी मानते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
भविष्य की क्या है उम्मीदें
अगले दो सालों में, 2026 और 2027 में, भारत की अर्थव्यवस्था क्रमशः 6.3% और 6.5% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। नॉमिनल ग्रोथ (बिना महंगाई एडजस्ट किए) 8% रहने का अनुमान है। इन सभी संकेतों से स्पष्ट है कि भारत न केवल अपनी ग्रोथ दर में तेज़ी ला रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

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