निजी स्कूलों तक पहुंचेगा लाभ
सरकार की यह तैयारी खास तौर पर उन परिवारों को ध्यान में रखकर की जा रही है, जिनकी बेटियां निजी स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ती हैं और जो मौजूदा छात्रवृत्ति या फीस प्रतिपूर्ति योजनाओं के दायरे में नहीं आ पातीं। सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षा निःशुल्क है, इसलिए अब फोकस निजी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाली जरूरतमंद छात्राओं पर रहेगा।
कोविड काल की घोषणा अब होगी लागू
कोविड महामारी के दौरान मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की शुरुआत के समय मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि यदि किसी शिक्षण संस्थान में दो सगी बहनें पढ़ रही हों, तो एक की फीस माफ करने का प्रयास किया जाए। यदि निजी संस्थान सहयोग न करें, तो सरकार खुद फीस प्रतिपूर्ति की व्यवस्था करेगी। उस समय सर्वे की प्रक्रिया शुरू भी हुई थी, लेकिन आचार संहिता के चलते योजना आगे नहीं बढ़ पाई। अब सरकार इसे दोबारा लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
महिला कल्याण विभाग बनेगा नोडल
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए महिला कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। चूंकि बेसिक, माध्यमिक, उच्च, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा अलग-अलग विभागों के अंतर्गत आती है, इसलिए एक सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए लाभार्थियों की पहचान और सहायता देने की तैयारी है। नोडल विभाग आय सीमा, पात्रता शर्तें, बजट की जरूरत और प्रक्रिया से जुड़े सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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