डीपीआर को मिली मंजूरी, जमीन अधिग्रहण तेज
रेलवे विभाग द्वारा कराए गए सर्वे के बाद इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद अब इस रेल रूट पर पड़ने वाले 62 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दे दी गई है। प्रशासन किसानों से संवाद बनाकर आपसी सहमति से जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है।
तीन स्टेशन और एक हाल्ट का होगा निर्माण
डीपीआर के अनुसार इस नई रेल लाइन पर जरवल कस्बा, कैसरगंज, फखरपुर में नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अलावा परसेंडी शुगर मिल के पास एक हाल्ट प्रस्तावित है। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सीधी रेल सुविधा मिल सकेगी।
कई जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
इस रेल मार्ग के शुरू होने से केवल बहराइच ही नहीं, बल्कि श्रावस्ती, बलरामपुर और सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ नेपाल से आने-जाने वाले यात्रियों को भी राजधानी लखनऊ तक सस्ती, तेज और सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।
2027 तक ट्रेन दौड़ने की उम्मीद
रेलवे और जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि यह बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना 2027 तक पूरी कर ली जाए। इसके बाद इस रूट पर नियमित रेल परिचालन शुरू हो सकेगा, जिससे पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल
नई रेल लाइन से न केवल यातायात सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह इलाका राजधानी से सीधे जुड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेगा।

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