भारत-EU ने किया ये बड़ा ऐलान, पाकिस्तान के उड़े होश!

नई दिल्ली। करीब बीस वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई है। यह समझौता जहां आर्थिक दृष्टि से दोनों पक्षों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, वहीं इसके राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी दूरगामी हैं। खास बात यह रही कि इस अहम समझौते के साथ ही भारत और EU ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी एकजुट और कड़ा रुख अपनाया है।

आतंकवाद पर दो टूक संदेश

भारत–EU के संयुक्त बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आतंकवाद की कड़ी निंदा की। इसमें सीमा पार आतंकवाद का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया, जिसे कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

पहलगाम और दिल्ली हमलों का ज़िक्र

संयुक्त बयान में पिछले वर्ष हुई दो बड़ी आतंकी घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा, 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किला के पास हुए आतंकी हमले में 12 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारत और EU दोनों ने इन हमलों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं वैश्विक शांति और मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं।

आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति

भारत और यूरोपीय संघ ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम जरूरी हैं। दोनों पक्षों ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने, मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने और आतंकी संगठनों में भर्ती पर लगाम लगाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

पाकिस्तान के लिए क्यों है ये चिंता की बात?

भारत–EU के इस संयुक्त रुख से पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। सीमा पार आतंकवाद का स्पष्ट उल्लेख और वैश्विक स्तर पर सख्त कार्रवाई की बात यह संकेत देती है कि अब ऐसे देशों के लिए बचाव की गुंजाइश कम होती जा रही है, जिन पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं।

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