भारत ने रखे प्रस्ताव, अमेरिका से इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने व्यापार समझौते को लेकर जो भी व्यावहारिक और रणनीतिक पेशकश करनी थी, वह कर दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भारत को जो देना था, वह दे चुका है। अब अमेरिकी प्रशासन को तय करना है कि वह इसे किस दिशा में ले जाना चाहता है।”
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में कुछ नेताओं या अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों को संदर्भ से हटकर नहीं देखा जाना चाहिए। असली बातचीत और उसकी बारीक जानकारी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और उनकी टीम के पास है, न कि उन लोगों के पास जो मीडिया में बयान दे रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ठप नहीं
सरकार ने उन अटकलों को भी खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ठप हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत अंतिम दौर में थी, तब भी अमेरिका के साथ संपर्क बना हुआ था।
EU समझौता, अमेरिका का विकल्प नहीं
सरकार ने यह भी साफ किया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को तेज़ी से पूरा करना अमेरिका के साथ अनिश्चितता का नतीजा नहीं है। एक शीर्ष वार्ताकार के मुताबिक, EU के साथ बातचीत अमेरिका की तुलना में कहीं पहले शुरू हो चुकी थी, इसलिए उसका पहले पूरा होना स्वाभाविक था। अधिकारियों ने दो टूक कहा कि भारत-EU समझौता और भारत-अमेरिका वार्ता, दोनों अपने-अपने स्वतंत्र रास्तों पर आगे बढ़ रही हैं।
भारत-EU FTA: एक ऐतिहासिक उपलब्धि
मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत पूरी हो गई। इसे भारत की व्यापार कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस समझौते में चरणबद्ध तरीके से शुल्क में कटौती, वस्तुओं और सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुंच, निवेश को बढ़ावा और नियामक सहयोग जैसे अहम प्रावधान शामिल हैं।

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