यूपी सरकार की बड़ी पहल: 11 जिलों के किसानों को खुशखबरी

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के साथ-साथ वैकल्पिक रोजगार के अवसर तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। “मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना” के तहत प्रदेश में रेशम उत्पादन को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना का उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना भी है।

रेशम उत्पादन में बड़ा लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2034-35 तक 360 टन अतिरिक्त रेशम धागे का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए रेशम विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जमीन पर काम शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि यह योजना तराई और पूर्वांचल के 11 जिलों पर केंद्रित है, जहां शहतूत आधारित रेशम उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाएगा।

लगातार बढ़ रहा उत्पादन

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहां पहले यह उत्पादन करीब 27 टन था, वहीं अब यह बढ़कर 450 से 500 टन तक पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 480 टन उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि 2026-27 के लिए 515 टन का लक्ष्य रखा गया है। इसके बावजूद प्रदेश को अपनी जरूरतों के लिए अभी भी दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।

इन 11 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, बलरामपुर, कुशीनगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर और सहारनपुर के किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। करीब 13,500 किसानों की 9000 एकड़ भूमि पर शहतूत के पौधे लगाए जाएंगे। शहतूत की पत्तियां रेशम के कीटों का मुख्य भोजन होती हैं, जिससे उत्पादन में तेजी आएगी।

75% तक सब्सिडी और प्रशिक्षण

सरकार इस योजना के तहत किसानों को शहतूत रोपण, कीट पालन गृह (रीयरिंग हाउस) और जरूरी उपकरणों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। इसके साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीकों, रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के तरीकों की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे नए किसान भी इस क्षेत्र में जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

‘फार्म टू फैब्रिक’ मॉडल पर जोर

सरकार का फोकस सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘फार्म टू फैब्रिक’ मॉडल के जरिए पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर है। इसका मतलब है कि किसान से लेकर बुनकर तक हर कड़ी को जोड़कर उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने की कोशिश की जा रही है।

किसानों के लिए नया अवसर

रेशम उद्योग को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है। कम लागत, सरकारी मदद और बाजार की उपलब्धता के कारण यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो आने वाले वर्षों में रेशम उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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