बिहार में जमीन के दामों में बड़ा उछाल: 4 गुना तक बढ़ सकती हैं कीमतें

पटना। बिहार में रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा तय न्यूनतम दर यानी एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में 300 से 400 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अगर इस पर मुहर लगती है, तो जमीन खरीदना आम लोगों के लिए काफी महंगा हो सकता है।

एमवीआर में होगी बड़ी बढ़ोतरी

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर एमवीआर में बड़े बदलाव का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत जमीन की सरकारी दरें तीन से चार गुना तक बढ़ाई जा सकती हैं। सरकार की मंजूरी मिलते ही नई दरें लागू कर दी जाएंगी।

लंबे समय से नहीं बढ़ी थीं दरें

राज्य में जमीन की सरकारी दरों में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्रों में आखिरी बार 2016 में एमवीआर बढ़ाया गया था, जबकि ग्रामीण इलाकों में 2013 के बाद कोई संशोधन नहीं हुआ था। इस बीच बाजार में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, जिससे सरकारी दरें और वास्तविक कीमतों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया।

शहरीकरण भी बड़ी वजह

पिछले एक दशक में बिहार में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। शहरी निकायों की संख्या 141 से बढ़कर 264 हो गई, कई ग्रामीण इलाके अब शहरी क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं। इसी वजह से जिलों ने एमवीआर में बड़े बदलाव की सिफारिश की है, ताकि सरकारी दरें बाजार के अनुरूप हो सकें।

क्या होता है एमवीआर?

एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू रजिस्टर वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर जमीन की रजिस्ट्री की जाती है। इसे आम भाषा में सर्किल रेट भी कहा जाता है। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क इसी के आधार पर तय होते हैं, एमवीआर से कम कीमत पर जमीन की रजिस्ट्री संभव नहीं होती। इसलिए एमवीआर बढ़ने का मतलब है कि रजिस्ट्री कराना भी महंगा हो जाएगा।

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