स्वप्रमाणन व्यवस्था लागू
कम जोखिम श्रेणी में आने वाले उद्योग अब स्वप्रमाणन का लाभ ले सकते हैं। इसके तहत उन्हें अपने प्रतिष्ठान में श्रम कानूनों के पालन का प्रमाण स्वयं देना होगा। विभाग इसका परीक्षण करेगा। यदि सबकुछ ठीक पाया गया, तो आगामी पांच वर्षों में सिर्फ एक बार ही सैंपल सर्वे किया जाएगा।
मध्यम जोखिम वाले उद्योग
मध्यम जोखिम श्रेणी में आने वाले उद्योगों के लिए सरकार ने थर्ड पार्टी ऑडिट की सुविधा शुरू की है। इससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरलता मिलेगी।
आवेदन और परीक्षण प्रक्रिया
उद्योगों को विभागीय पोर्टल (uplabour.gov.in) पर अपना आवेदन अपलोड करना होगा। आवेदन में श्रम कानूनों के पालन की घोषणा करनी होगी। विभाग को 60 दिनों के भीतर आवेदन का परीक्षण करना होगा। इस दौरान अगर कोई त्रुटि मिले तो सुधार के निर्देश दिए जाएंगे, अन्यथा आवेदन स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
वार्षिक विवरण और निरीक्षण
नियोजक को सालाना विवरणी हर कैलेंडर वर्ष की समाप्ति पर अगले वर्ष 31 जनवरी तक पोर्टल पर जमा करनी होगी। शिकायत की स्थिति में ही श्रमायुक्त की अनुमति से अतिरिक्त निरीक्षण होगा। इसके अलावा, पांच साल में केवल 20 प्रतिशत प्रतिष्ठानों का रैंडम निरीक्षण किया जाएगा, और इसकी जानकारी संबंधित प्रतिष्ठानों को 48 घंटे पहले दे दी जाएगी।
इसका असर और लाभ क्या होगा?
इस नई पहल से छोटे उद्योगों को सरकारी तंत्र में समय और प्रयास की बचत होगी। साथ ही, निवेशकों और उद्यमियों के लिए उत्तर प्रदेश में व्यापार करना आसान और आकर्षक बनेगा। इस कदम से प्रदेश में उद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी मजबूती मिलेगी।

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