किन अधिकारियों पर लागू होंगे नए नियम
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी यदि किसी जिले में तीन वर्ष या किसी मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं तो उनका स्थानांतरण किया जाएगा। इसी तरह संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक यदि किसी जिले या मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय तक कार्यरत हैं तो उनका भी तबादला किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीधे मरीजों की सेवा से जुड़े डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को केवल सेवाकाल पूरा होने के आधार पर अनिवार्य रूप से बाहर नहीं भेजा जाएगा।
आकांक्षी जिलों के लिए विशेष व्यवस्था
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए आकांक्षी जिलों में विशेष प्रावधान किए हैं। चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे जिलों में सभी पदों पर पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को दो वर्ष पूरा होने के बाद विकल्प के आधार पर स्थानांतरण दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है।
जिले के अंदर भी हो सकेंगे तबादले
नई नीति के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन कार्यरत अधीक्षक और एमओआईसी को तीन वर्ष पूरा होने पर उसी जिले के दूसरे अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में तैनात किया जा सकता है। इससे विभाग के अंदर प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
गंभीर बीमारी में मिलेगी राहत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लिपिकीय और नर्सिंग स्टाफ को पूर्व तैनाती स्थल पर दोबारा नियुक्ति केवल गंभीर बीमारी जैसी विशेष परिस्थितियों में ही दी जाएगी। इसके अलावा प्रशासनिक आवश्यकता होने पर किसी भी समय तबादले किए जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।
नई नीति से क्या होगा फायदा
नई तबादला नीति का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना और कर्मचारियों को अनावश्यक स्थानांतरण से राहत देना है। लंबे समय से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इस बात की मांग कर रहे थे कि सिर्फ सेवाकाल पूरा होने के आधार पर उन्हें दूरस्थ जिलों में न भेजा जाए।

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