1. बच्चे के वजन के हिसाब से बैग का वजन
नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी छात्र के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे का वजन 25 किलोग्राम है तो उसका बैग अधिकतम 2.5 किलोग्राम तक ही होना चाहिए। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की पीठ और कंधों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा।
2. बच्चों के बैग की नियमित जांच करेंगे शिक्षक
कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के बैग की नियमित जांच की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। शिक्षक समय-समय पर यह देखेंगे कि बच्चे जरूरत से ज्यादा सामान तो नहीं ला रहे हैं। अगर बैग अधिक भारी पाया गया तो अभिभावकों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
3. स्कूलों में लगानी होगी वजन मापने की मशीन
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में वजन मापने की मशीन लगाना अनिवार्य कर दिया है। इससे समय-समय पर बच्चों और उनके बैग का वजन जांचा जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए जरूरी है और इससे नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
4. टाइम-टेबल में होगा बड़ा बदलाव
स्कूलों को ऐसा टाइम-टेबल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे बच्चों को रोजाना सभी किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल न आना पड़े। केवल जरूरी विषयों की पुस्तकें ही बैग में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे बच्चों का बैग हल्का रहेगा और अनावश्यक बोझ कम होगा।
5. खेल और गतिविधियों पर भी दिया जाएगा जोर
नई गाइडलाइन में पढ़ाई के साथ खेल, कला और शारीरिक गतिविधियों को भी पर्याप्त समय देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि केवल किताबों का दबाव बच्चों के मानसिक तनाव को बढ़ाता है। संतुलित गतिविधियों से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।

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