हर 5 साल में पेंशन संशोधन की मांग
कर्मचारी संगठनों ने मांग उठाई कि पेंशन में हर पांच साल पर संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में केवल वेतन आयोग के दौरान बदलाव होने से महंगाई के मुकाबले पेंशन पर्याप्त नहीं रह जाती। इस पर कैबिनेट सेक्रेटरी ने भरोसा दिलाया कि इस प्रस्ताव को 8वें वेतन आयोग के सामने रखा जाएगा। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो पेंशनर्स को नियमित अंतराल पर राहत मिल सकती है।
फैमिली पेंशन में कटौती रोकने की मांग
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि मृतक कर्मचारी या पेंशनर के परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन में अधिक कटौती नहीं होनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार को केवल सीमित प्रतिशत पेंशन मिलती है, जिससे आर्थिक कठिनाई बढ़ती है। सरकार ने इस मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए इसे वेतन आयोग के पास भेजने की बात कही है।
दिव्यांग आश्रित बच्चों को राहत की उम्मीद
शारीरिक रूप से दिव्यांग आश्रित बच्चों के लिए फैमिली पेंशन लेने में आने वाली दिक्कतों का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। वर्तमान में कई मामलों में ‘कोई आय नहीं’ प्रमाण पत्र मांगा जाता है, जिसे प्राप्त करना काफी मुश्किल होता है। कर्मचारी पक्ष ने इस शर्त को हटाने की मांग की है। बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी ने संबंधित विभाग को इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।
कुछ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना
बैठक में पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी कि जिन पदों की भर्ती प्रक्रिया 22 दिसंबर 2003 से पहले शुरू हुई थी, उन कर्मचारियों को OPS का लाभ दिया जाए, भले ही उनकी नियुक्ति बाद में हुई हो। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों को भी OPS के दायरे में लाने पर सहमति बनती दिखाई दी। इससे हजारों कर्मचारियों को भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है।
परिवार की परिभाषा में बदलाव की मांग
कर्मचारी संगठनों ने फैमिली पेंशन के लिए परिवार की परिभाषा में संशोधन की मांग भी उठाई है। इसमें विधवा बहू और आश्रित बहू को भी पारिवारिक पेंशन का अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार ने इस मामले की कानूनी समीक्षा कराने का आश्वासन दिया है। यदि नियमों में बदलाव होता है तो कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।

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