यूपी में बनें 'ग्राम प्रधान', पंचायत चुनाव की तैयारी तेज!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला पंचायत सदस्य बनने की तैयारी कर रहे लोगों के बीच चुनाव को लेकर चर्चा बढ़ गई है। इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी देकर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को नई दिशा दे दी है।

ओबीसी आयोग का गठन

प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित ओबीसी आयोग का गठन किया है। आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की स्थिति का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा।

चुनाव में हो सकती है देरी

हालांकि पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस साल चुनाव होने की संभावना कम मानी जा रही है। सरकार द्वारा गठित आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। इसके बाद आरक्षण तय होगा, आपत्तियां मांगी जाएंगी और उनका निस्तारण किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है।

प्रदेश में हैं हजारों पंचायतें

उत्तर प्रदेश में पंचायत व्यवस्था का दायरा काफी बड़ा है। प्रदेश में 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। इन सभी स्तरों पर चुनाव होना है। वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 26 मई 2026 तक मान्य है। इसके बाद नई पंचायतों का गठन होना जरूरी होगा, लेकिन चुनाव प्रक्रिया लंबी होने के कारण देरी की संभावना जताई जा रही है।

क्या बढ़ सकता है वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल?

रिपोर्ट के अनुसार पंचायती राज विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर वर्तमान ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव होने तक प्रशासक समिति बनाकर मौजूदा प्रतिनिधियों को ही कामकाज सौंपा जा सकता है।

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