अब इन कर्मचारियों के वेतन में तीन हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें 19 मई से लागू हो चुकी हैं, जिससे प्रदेश के करीब चार हजार कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं।
अनुभव के आधार पर तय हुई नई श्रेणियां
परिवहन निगम ने कर्मचारियों को उनके अनुभव के अनुसार तीन वर्गों में बांटा है। दो वर्ष तक काम करने वाले कर्मचारियों को अकुशल श्रेणी में रखा गया है। वहीं दो से पांच वर्ष तक का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को अर्द्धकुशल श्रेणी में शामिल किया गया है। पांच वर्ष से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों को कुशल श्रेणी का दर्जा दिया गया है। निगम प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था श्रम विभाग के आदेश के अनुसार लागू की गई है और किसी भी कर्मचारी को तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जाएगा।
अलग-अलग जिलों में अलग मिलेगा भुगतान
प्रदेश में जिलों की श्रेणी के अनुसार कर्मचारियों का पारिश्रमिक तय किया गया है। गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे प्रथम श्रेणी के जिलों में कर्मचारियों को सबसे अधिक मानदेय मिलेगा। नगर निगम वाले जिलों के लिए अलग दरें तय की गई हैं, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अन्य जिलों के लिए अलग भुगतान संरचना लागू होगी।
प्रथम श्रेणी जिले: गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर
इन जिलों में अकुशल कर्मचारियों को अब लगभग 13,690 रुपये मिलेंगे। अर्द्धकुशल कर्मचारियों का मानदेय बढ़कर 15,059 रुपये हो गया है, जबकि कुशल कर्मचारियों को 16,868 रुपये तक भुगतान मिलेगा।
द्वितीय श्रेणी जिले: नगर निगम वाले क्षेत्र
नगर निगम क्षेत्रों में कार्यरत अकुशल कर्मचारियों को 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल कर्मचारियों को 14,306 रुपये और कुशल कर्मचारियों को 16,025 रुपये तक मानदेय दिया जाएगा।
तृतीय श्रेणी वाले जिलों के लिए मानदेय
अन्य प्रथम और द्वितीय श्रेणी जिलों में अकुशल कर्मचारियों को 12,356 रुपये, अर्द्धकुशल कर्मचारियों को 13,590 रुपये तथा कुशल कर्मचारियों को 15,224 रुपये तक भुगतान मिलेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
निगम प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित सेवा प्रबंधक जिम्मेदार माने जाएंगे। बढ़े हुए मानदेय का अतिरिक्त वित्तीय भार निगम स्वयं वहन करेगा।

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