1 .न्यूनतम सैलरी बढ़ाने की सबसे बड़ी मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाने को लेकर है। प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यूनतम सैलरी को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 65 हजार से 69 हजार रुपये प्रति माह तक किया जाए। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की भी मांग की गई है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों की कुल सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि इससे लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
2 .हर साल ज्यादा इंक्रीमेंट देने की मांग
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि सिर्फ एक बार वेतन बढ़ोतरी करने के बजाय सालाना इंक्रीमेंट भी बढ़ाया जाए। अभी कर्मचारियों को हर साल 3 प्रतिशत की वृद्धि मिलती है, लेकिन इसे बढ़ाकर 5 से 6 प्रतिशत करने की मांग रखी गई है। संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ रही महंगाई और जीवनयापन के खर्च को देखते हुए मौजूदा इंक्रीमेंट पर्याप्त नहीं है।
3 .पेंशन सिस्टम में बदलाव की मांग
पेंशनर्स संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग दोहराई है। इसके अलावा पेंशन और महंगाई भत्ते के बीच बेहतर संतुलन बनाने की बात कही गई है। कई संगठनों का कहना है कि रिटायर कर्मचारियों को नई वेतन संरचना के अनुसार उचित लाभ मिलना चाहिए ताकि उनकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।
4 .प्रमोशन आसान करने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने प्रमोशन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की भी मांग उठाई है। सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों को तय समय पर प्रमोशन मिले और वेतन मैट्रिक्स को कम जटिल बनाया जाए। कुछ संगठनों ने तकनीकी और रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए स्किल आधारित वेतन व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव भी दिया है। इसके अलावा 10-20-30 प्रमोशन मॉडल पर भी चर्चा हो रही है, जिसमें कर्मचारियों को निश्चित अंतराल पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।
5 .HRA अन्य भत्तों में वृद्धि मांग
कर्मचारी संगठनों ने हाउस रेंट अलाउंस, ट्रैवल अलाउंस और अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी की मांग की है। कई संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में रहने और यात्रा खर्च लगातार बढ़ रहा है, इसलिए भत्तों को मौजूदा जरूरतों के अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए। कुछ प्रस्तावों में रिस्क अलाउंस बढ़ाने की भी मांग शामिल है।
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