यूपी में इन शिक्षकों की बल्ले-बल्ले, सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गैर-सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्षों से कार्यरत तदर्थ शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य में करीब 2300 तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे लंबे समय से लंबित इस मांग को नई उम्मीद मिलती दिख रही है।

वर्षों पुरानी मांग को मिल सकता है समाधान

शिक्षक संगठनों के अनुसार, यह मुद्दा कई वर्षों से लंबित है। माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जो शिक्षक 30 साल से अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें अब स्थायी दर्जा मिलना चाहिए, ताकि तदर्थ व्यवस्था को समाप्त किया जा सके।

नियमों के तहत होगा नियमितीकरण

जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा सेवा अधिनियम-2016 के प्रावधानों के तहत 7 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 के बीच नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण का प्रावधान मौजूद है। इसी आधार पर इन शिक्षकों के मामलों की समीक्षा की जा रही है।

प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश

माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमितीकरण प्रक्रिया में केवल निर्धारित समय सीमा और शिक्षक की लगातार सेवा को ही मुख्य आधार माना जाए। वेतन भुगतान या अन्य अनावश्यक कारकों को आधार न बनाते हुए नियमों के अनुसार जांच पूरी करने पर जोर दिया गया है।

शिक्षक संगठनों की मांग

माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के पदाधिकारियों ने कहा है कि वर्षों से सेवा दे रहे इन शिक्षकों को अब न्याय मिलना चाहिए। उनका मानना है कि नियमितीकरण से न केवल शिक्षकों को स्थिरता मिलेगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और व्यवस्थित होगी।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

जानकारों का मानना है कि यदि यह नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी होती है, तो इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि माध्यमिक शिक्षा में गुणवत्ता और स्थिरता भी आएगी। लंबे समय से चल रही तदर्थ व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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