मातृभाषा में पढ़ाई को मिलेगा बढ़ावा
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों को शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में देने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में यह फैसला लिया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अपनी भाषा में पढ़ाई करते हैं तो उनकी समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है।
मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने से अब लाखों छात्रों को अपनी भाषा में पढ़ने का मौका मिलेगा। मैथिली भाषा लंबे समय से अपनी समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती है। ऐसे में यह फैसला भाषा के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इसे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सम्राट चौधरी ने जताई खुशी
केंद्र के इस फैसले पर सीएम सम्राट चौधरी ने खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में स्थान मिलना मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देगा। साथ ही भारतीय भाषाओं को सम्मान देने की दिशा में यह बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले समय में मैथिली भाषा और साहित्य को भी नई पहचान मिलेगी और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहेगी।
शिक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में मैथिली को भी कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक पढ़ाने की मंजूरी दी गई है। इस फैसले के बाद मिथिला क्षेत्र में खुशी का माहौल है। साहित्यकारों, शिक्षकों और छात्रों ने इसे भाषा और संस्कृति के सम्मान से जोड़कर देखा है। माना जा रहा है कि इससे मैथिली भाषा का प्रचार-प्रसार और अधिक बढ़ेगा।
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