इस नीति का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित स्वास्थ्य व्यवस्था को बदलकर उत्तर प्रदेश को आयुष, योग, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से एक बड़े वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है। इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य के साथ रोजगार और निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन और गुणवत्ता मानकों से जोड़कर ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीति सिर्फ चिकित्सा सुधार का नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का भी बड़ा माध्यम बनेगी।
धार्मिक स्थलों के आसपास बनेगा वेलनेस टूरिज्म मॉडल
सरकार की योजना के तहत वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित किया जाएगा। आयुष और योग की परंपरा को धार्मिक पर्यटन से जोड़कर उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस हब बनाने की तैयारी है।
आयुष संस्थानों का होगा बड़ा विस्तार
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में हजारों आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, योग वेलनेस सेंटर और आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहले से संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन संस्थानों को केवल इलाज केंद्र नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
पीपीपी मॉडल से बनेंगे वेलनेस सेंटर
नई नीति के तहत पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर और एकीकृत चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और रिसर्च सुविधाएं शामिल होंगी।
निवेशकों के लिए आसान व्यवस्था
सरकार ने निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकल खिड़की प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सके। नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, ब्याज पर छूट, स्टांप ड्यूटी में राहत और रोजगार सृजन पर विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
नए आयुष कॉलेज और शोध केंद्रों पर फोकस
प्रदेश के कई मंडलों में एकीकृत आयुष कॉलेज और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे। इनमें मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा और बस्ती शामिल हैं। इसके साथ ही आयुष चिकित्सा में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों को मजबूत किया जाएगा।

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