यूपी से बड़ी खबर, 'ग्राम प्रधानों' का कार्यकाल होगा समाप्त, आगे क्या?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। प्रदेश में ग्राम प्रधानों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है और इसी के साथ गांवों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। आने वाले 48 घंटों के भीतर सरकार पंचायतों के संचालन को लेकर अहम फैसला ले सकती है, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

प्रशासक को लेकर बड़ा फैसला संभव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार इस बार एक नया प्रयोग करने पर विचार कर रही है। अब तक पंचायतों में प्रशासनिक जिम्मेदारी एडीओ पंचायत को दी जाती थी, लेकिन इस बार मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो चुनाव होने तक ग्राम प्रधान ही अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे

27 हजार से अधिक प्रधानों का कार्यकाल समाप्त

प्रदेश के लगभग 27,694 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है। इसके बाद पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार का यह कदम ग्रामीण विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।

इस बार के पंचायत चुनाव में देरी की क्या है वजह?

कई रिपोर्ट के अनुसार पंचायत चुनाव फिलहाल विधानसभा चुनाव 2027 के बाद कराए जाने की तैयारी है। चुनाव में देरी की प्रमुख वजहों में पंचायत मतदाता सूची का अभी पूरा न होना और ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही प्रक्रिया शामिल है। अंतिम मतदाता सूची 10 जून को जारी होने की संभावना है।

ओबीसी आरक्षण पर आयोग की रिपोर्ट अहम

पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण को अंतिम रूप देने के लिए सरकार ने आयोग का गठन किया है। आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह कर रहे हैं। आयोग को छह महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके बाद ही आरक्षण व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।

आगे क्या होगा?

अगले कुछ दिनों में सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक निर्णय आने की संभावना है। यदि मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाता है तो यह यूपी की पंचायत व्यवस्था में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव माना जाएगा, जो आने वाले समय में ग्रामीण राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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