यूपी में ग्राम प्रधानों को मिली सुपर पावर, गांवों में नया सिस्टम लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों के लिए एक बड़ी और अहम राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों में प्रशासक की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को ही सौंपी जाएगी। इस निर्णय के बाद प्रदेश की 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था ग्राम प्रधानों के हाथों में रहेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद पंचायती राज विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा।

ग्राम प्रधान ही बनेंगे प्रशासक

सरकार के इस फैसले के अनुसार, अब ग्राम पंचायतों में किसी बाहरी अधिकारी की जगह मौजूदा ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। इससे पहले यह जिम्मेदारी आमतौर पर एडीओ पंचायत या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को दी जाती रही है। यह पहली बार है जब प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों को सीधे प्रशासक की भूमिका दी जा रही है।

57,000 से अधिक पंचायतों में लागू

प्रदेश की लगभग 57,694 ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था लागू होगी। जिन ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, वहां अब नई निर्वाचित इकाई बनने तक ग्राम प्रधान ही प्रशासनिक कामकाज संभालेंगे। इस निर्णय से पंचायत स्तर पर कामकाज में निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है।

पंचायत चुनाव में देरी की वजह क्या है?

पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने की प्रमुख वजह पिछड़ा वर्ग आरक्षण आयोग के गठन में देरी बताई जा रही है। हालांकि सरकार ने हाल ही में आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन वोटर लिस्ट के अद्यतन और अन्य प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण चुनाव तुरंत संभव नहीं हो पाए हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

प्रशासनिक कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा

इस निर्णय से पंचायतों में विकास कार्यों के रुकने की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। ग्राम प्रधानों का मानना है कि जब प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके पास होगी तो योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक तेजी और पारदर्शिता से हो सकेगा। स्थानीय लोगों को भी उम्मीद है कि इससे पंचायत स्तर पर कामकाज अधिक सुचारू रहेगा।

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