ग्राम्य विकास विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों के अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सर्वे के दौरान चयनित कुओं का जलस्तर मापा जाएगा और पूरा डेटा जलदूत एप पर दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही सूख चुके कुओं का भी अलग से रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां भूजल तेजी से नीचे जा रहा है।
वैज्ञानिक तरीके से होगा सर्वे
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि जलस्तर मापने के लिए मेजरिंग टेप का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। सर्वे के दौरान फोटो प्रलेखन भी किया जाएगा ताकि आंकड़ों की पारदर्शिता बनी रहे। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि एक ग्राम पंचायत के सभी कुओं का डेटा एक ही दिन में एकत्र किया जाए, जिससे रिपोर्ट अधिक सटीक बन सके।
जलदूत एप से मिलेगी बड़ी मदद
इस अभियान में जलदूत एप की अहम भूमिका होगी। सभी सर्वे रिपोर्ट और माप संबंधी जानकारी इसी एप में अपलोड की जाएगी। इससे सरकार को प्रदेशभर के भूजल स्तर की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड मिल सकेगा। साथ ही जल संकट वाले इलाकों की पहचान करना भी आसान होगा।
भविष्य की योजनाओं में होगा उपयोग
सरकार का मानना है कि यह सर्वे आने वाले समय में जल संरक्षण योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा। वर्षा जल संचयन, तालाबों के पुनर्जीवन और पानी बचाने से जुड़ी योजनाओं की प्राथमिकता तय करने में भी इस डेटा का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सर्वे कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ कराया जाए। उन्होंने कहा कि बढ़ते जल संकट को देखते हुए समय रहते सही योजना बनाना बेहद जरूरी है।
गांवों को मिलेगा इसका सबसे बड़ा फायदा
इस अभियान से गांवों में जल संकट की स्थिति को पहले से समझने में मदद मिलेगी। जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है वहां समय रहते विशेष योजनाएं शुरू की जा सकेंगी। सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को मजबूत करने और भविष्य के लिए पानी बचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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