पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। हॉर्मुज मार्ग से आने वाली खाद और कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट आने से यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों को लेकर बाजार में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब जहाजों की आवाजाही शुरू होने से स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
खरीफ सीजन के लिए मजबूत होगा खाद भंडार
देश में खरीफ फसलों की बुवाई से पहले पर्याप्त मात्रा में खाद का स्टॉक रखना जरूरी होता है। सरकार लगातार दावा करती रही है कि किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब इन जहाजों के पहुंचने से खाद भंडारण को और मजबूती मिलने की संभावना है। खाद की उपलब्धता बेहतर होने से किसानों को समय पर यूरिया, डीएपी और अन्य जरूरी उर्वरक मिलने में मदद मिल सकती है।
यूरिया बाजार में राहत के बड़े संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। इससे आने वाले समय में खाद की लागत और सरकार पर सब्सिडी के दबाव में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। कुछ समय पहले वैश्विक तनाव के कारण खाद के कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई थी। अमोनिया और सल्फर जैसे उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने से बाजार में दबाव बढ़ गया था।
हॉर्मुज मार्ग भारत के लिए क्यों है अहम
हॉर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए खाद आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। पश्चिम एशिया से भारत को बड़ी मात्रा में खाद और उससे जुड़े कच्चे पदार्थ मिलते हैं। इस मार्ग में रुकावट आने पर यूरिया उत्पादन और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से सरकार ने पहले से ही अतिरिक्त इंतजाम किए थे, ताकि किसानों को बुवाई के समय किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
धीरे-धीरे सामान्य होगी स्थिति
जानकारों का मानना है कि जहाजों की आवाजाही लगातार बनी रहती है तो खाद की उपलब्धता में सुधार आएगा और बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए पूरी स्थिति सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। फिलहाल किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि खरीफ सीजन से पहले खाद आपूर्ति को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। इससे खेती की तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है।

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