पहली से पांचवीं तक के लिए नया मानक
प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के लिए छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षकों की जरूरत तय की गई है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 60 तक है, वहां कम से कम दो शिक्षक रहेंगे।
वहीं, 61 से 90 छात्रों वाले विद्यालयों में तीन शिक्षक, 91 से 120 छात्रों वाले स्कूलों में चार शिक्षक और 121 से 150 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में पांच शिक्षकों की व्यवस्था होगी।
150 से अधिक बच्चों वाले विद्यालयों में पांच शिक्षकों के साथ एक प्रधान शिक्षक का पद भी रहेगा। विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि शिक्षक-छात्र अनुपात निर्धारित सीमा से ज्यादा न हो।
कक्षा 6 से 8 तक विषयवार होंगे शिक्षक
मध्य विद्यालयों में भी शिक्षकों की नियुक्ति विषय की जरूरत के अनुसार की जाएगी। कक्षा 6 से 8 तक हर स्कूल में विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषय के शिक्षक उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
यदि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त विषयों के शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। 105 से अधिक छात्रों पर अंग्रेजी शिक्षक और ज्यादा नामांकन होने पर संस्कृत या उर्दू विषय के शिक्षक भी दिए जाएंगे। इससे छात्रों को सभी प्रमुख विषयों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक मिल सकेंगे।
प्रधान शिक्षक की भूमिका रहेगी अलग
नई व्यवस्था में कक्षा 1 से 8 तक संचालित विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता अलग-अलग शैक्षणिक इकाई के आधार पर तय होगी, लेकिन विद्यालय में प्रधान शिक्षक की जिम्मेदारी अलग रहेगी। इस बदलाव से स्कूल प्रबंधन और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों की संख्या और स्कूलों की जरूरत के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सकेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी जिलों के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता का नया ढांचा तैयार होगा।

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