नई नीति में अब ज्यादा कमरों को मिलेगी मंजूरी
नई नीति के तहत होम स्टे संचालन की सीमा को बढ़ाया गया है। पहले जहां अधिकतम 6 कमरों की अनुमति थी, अब इसे बढ़ाकर 8 कमरे कर दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में लोग अपने घर या तय नियमों के अनुसार ली गई रिहायशी संपत्ति में होम स्टे शुरू कर सकेंगे। इसमें जरूरी शर्त यह रखी गई है कि मकान मालिक या उनका परिवार उसी परिसर में निवास करे, ताकि पर्यटकों को घर जैसा अनुभव मिल सके।
ऑनलाइन होगा रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण
सरकार ने होम स्टे संचालकों की सुविधा के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया है। अब रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकेंगे। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। संचालक समय पूरा होने से पहले पोर्टल के जरिए अपने पंजीकरण का नवीनीकरण करा सकेंगे।
गांव और कस्बों में बढ़ेंगे कमाई के अवसर
सरकार का मानना है कि होम स्टे योजना से सिर्फ बड़े शहरों को नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों को भी फायदा मिलेगा। पर्यटक जब स्थानीय क्षेत्रों में रुकेंगे तो वहां के लोगों को भोजन, रहने की सुविधा, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवाओं के जरिए आय का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों को मिलेगा घर जैसा अनुभव
होम स्टे की खासियत यह है कि पर्यटक होटल के बजाय स्थानीय परिवारों के साथ रहकर क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को करीब से जान सकते हैं। इसमें रहने के साथ नाश्ता और भोजन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों वाले क्षेत्रों में इसका फायदा ज्यादा मिलने की संभावना है।
युवाओं और परिवारों के लिए स्वरोजगार
नई नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि लोग अपने घर की उपलब्ध जगह का इस्तेमाल कर आय का साधन बना सकें। इससे खासकर युवाओं और छोटे उद्यमियों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं।

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