न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग
रेलवे कर्मचारी संगठन ने मांग की है कि न्यूनतम बेसिक वेतन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 52,600 रुपये किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च को देखते हुए वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव जरूरी है। अगर इस मांग को मंजूरी मिलती है तो शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
फिटमेंट फैक्टर में बदलाव का प्रस्ताव
वेतन बढ़ोतरी में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है। रेलवे कर्मचारी संगठन ने सभी कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर रखने के बजाय पद और जिम्मेदारी के आधार पर अलग-अलग फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है।
प्रस्ताव के अनुसार:
लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों के लिए 2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है।
लेवल 6, 7 और 8 के सुरक्षा और सुपरवाइजरी पदों के लिए करीब 3.50 फिटमेंट फैक्टर
लेवल 9 से 12 के पदों के लिए 3.80 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी गई है।
इससे अलग-अलग पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव हो सकता है।
सुरक्षा श्रेणी के कर्मचारियों पर विशेष ध्यान
रेलवे कर्मचारी संगठन ने रेल संचालन से जुड़े सुरक्षा श्रेणी के पदों को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियां अधिक होती हैं, इसलिए उनके वेतन निर्धारण में अतिरिक्त लाभ दिया जाना चाहिए।
DA और भत्तों को लेकर भी उम्मीद
रेलवे कर्मचारियों को महंगाई भत्ते और अन्य सुविधाओं में भी सुधार की उम्मीद है। कर्मचारियों का मानना है कि नए वेतन आयोग में महंगाई और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भत्तों की समीक्षा की जानी चाहिए।
कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?
8वें वेतन आयोग का गठन 2025 में किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार कर सरकार को सौंपनी हैं। उम्मीद है कि रिपोर्ट 2027 के आसपास आ सकती है। इसके बाद सरकार की मंजूरी, नियमों की प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था पूरी होने में समय लग सकता है। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखते हुए नई वेतन व्यवस्था लागू होने में कुछ समय लगने की संभावना है।

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