नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों के पदस्थापन, स्थानांतरण और विद्यालयों में शिक्षकों के संतुलन पर सीधा असर पड़ेगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि जिस स्कूल में जितनी जरूरत हो, वहां उसी अनुपात में शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं।
नामांकन के अनुसार स्वीकृत होंगे शिक्षक पद
शिक्षा विभाग ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता तय करने के लिए नया मानक तैयार किया है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों में छात्र संख्या, विषयवार मांग और संकाय के आधार पर शिक्षकों के पद निर्धारित किए जाएंगे। इसमें विज्ञान, कला, वाणिज्य, भाषा, कंप्यूटर और संगीत जैसे विषयों के शिक्षकों को शामिल किया जाएगा। अगर किसी विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो वहां जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों के पद भी स्वीकृत किए जा सकेंगे।
स्कूलों में शिक्षक असंतुलन होगा दूर
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया था कि कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शिक्षक अधिक हैं, जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसी असमानता को खत्म करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब शिक्षकों का समायोजन इस तरह किया जाएगा कि विद्यार्थियों को सभी जरूरी विषयों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक मिल सकें।
छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षक मानक
उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था तय की गई है।
1 से 360 छात्रों पर 15 शिक्षक
361 से 600 छात्रों पर 17 शिक्षक
601 से 840 छात्रों पर 20 शिक्षक
841 से 1080 छात्रों पर 22 शिक्षक
1081 से 1320 छात्रों पर 25 शिक्षक
1321 से 1560 छात्रों पर 27 शिक्षक
वहीं 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए भी अलग-अलग मानक बनाए गए हैं। 420 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें शारीरिक शिक्षा और कला-संगीत के शिक्षक भी शामिल होंगे।
क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों को भी मिलेगा स्थान
नई व्यवस्था में हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत के साथ-साथ उर्दू, मैथिली, भोजपुरी, मगही, पाली, फारसी, प्राकृत, बंगला और अरबी जैसे विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति का भी प्रावधान रखा गया है। हालांकि इन विषयों में शिक्षक तभी स्वीकृत होंगे जब विद्यालय में पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी मौजूद होंगे।
छोटे विद्यालयों के लिए भी तय व्यवस्था
120 से 180 छात्र संख्या वाले विद्यालयों में छह शिक्षकों की व्यवस्था होगी। इसमें सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत या उर्दू विषय के शिक्षक शामिल होंगे। शिक्षा विभाग की इस पहल से उम्मीद है कि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर होगी और विद्यार्थियों को विषयवार पढ़ाई का अधिक लाभ मिल सकेगा। नई व्यवस्था आगामी शिक्षक स्थानांतरण नीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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