ऊर्जा बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारत का यह फैसला आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट से बचने की रणनीति का हिस्सा है। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। हालांकि ये बातें अमेरिका की चिंता बढ़ा रही हैं।
रूस से बढ़ा तेल आयात
आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। मई की तुलना में जून में रूसी तेल की खरीद में तेजी देखी गई। रियायती कीमतों पर मिलने वाला रूसी कच्चा तेल भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत रूस से तेल खरीद को प्राथमिकता दे रहा है।
UAE से भी बढ़ाई गई खरीद
भारत ने रूस के अलावा संयुक्त अरब अमीरात से भी कच्चे तेल की खरीद जारी रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि UAE से आयात बढ़ाने का उद्देश्य आपूर्ति के विकल्प मजबूत करना है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम के बीच भारत अलग-अलग देशों से तेल की व्यवस्था कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है।
अमेरिका से तेल आयात में गिरावट
इस दौरान अमेरिका से भारत के कच्चे तेल आयात में कमी दर्ज की गई है। पहले की तुलना में अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी घटी है, जबकि रूस और अन्य देशों से सप्लाई बढ़ी है। इसी वजह से इसे भारत की बदलती ऊर्जा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी तनाव की स्थिति में इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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