बता दें की इस सुविधा के तहत वर्ष 1996 से 2026 तक के निबंधित दस्तावेजों को डिजिटल रूप में पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। इससे जमीन खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और पुराने रिकॉर्ड की जानकारी हासिल करना पहले से काफी आसान हो गया है।
ऑनलाइन मिल रही सर्टिफाइड कॉपी की सुविधा
निबंधन विभाग की डिजिटल पहल के तहत अब लोग अपने प्रॉपर्टी दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी ऑनलाइन देख सकते हैं। विभाग के ई-निबंधन पोर्टल पर जाकर पुराने रिकॉर्ड को खोजा जा सकता है और जरूरत के अनुसार डाउनलोड भी किया जा सकता है। यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें जमीन के पुराने कागजात की जरूरत पड़ती है। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
लाखों दस्तावेज किए गए डिजिटल
विभाग के अनुसार वर्ष 2006 के बाद के करीब 47 लाख से ज्यादा दस्तावेजों की पीडीएफ फाइल तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। अब लोगों को इन रिकॉर्ड के लिए दफ्तरों में आवेदन करने और लंबा इंतजार करने की परेशानी कम होगी।
पुराने रिकॉर्ड भी ऑनलाइन
सरकार अब इससे भी पुराने दस्तावेजों को डिजिटल करने का काम कर रही है। वर्ष 1908 से 1995 तक के रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन लाने की प्रक्रिया चल रही है। इस अवधि के करोड़ों दस्तावेजों को स्कैन और डिजिटाइज किया जा रहा है। इसके लिए कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं, ताकि पुराने जमीन रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा सके।
फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
जमीन के दस्तावेज ऑनलाइन होने से आम लोगों को कई फायदे मिलेंगे। रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होने से जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा फर्जी कागजात बनाकर जमीन से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी करने वालों पर भी रोक लगाने में सहायता मिलेगी। डिजिटल रिकॉर्ड से दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकेगी।
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