सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों की प्रतिभा को समय रहते पहचाना जाए और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिले। इस पहल की शुरुआत मॉडल स्कूलों से की जाएगी। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे अन्य विद्यालयों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।
9वीं से मिलेगी मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी
आमतौर पर विद्यार्थी मैट्रिक के बाद यानी 11वीं कक्षा में अपने विषय और करियर की दिशा चुनते हैं। लेकिन नई व्यवस्था में छात्रों को 9वीं कक्षा से ही करियर आधारित तैयारी शुरू करने का मौका मिलेगा। मॉडल स्कूलों में नियमित पढ़ाई के साथ इच्छुक विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
534 प्रखंडों में खुलेंगे आधुनिक मॉडल स्कूल
बिहार सरकार ने राज्य के सभी 534 प्रखंडों में एक-एक अत्याधुनिक मॉडल स्कूल खोलने की योजना बनाई है। इन स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कराई जाएगी। इन विद्यालयों में प्रवेश कक्षा 9वीं में परीक्षा और मेरिट के आधार पर होगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए।
प्रतिभाओं को निखारने का बनेगा मंच
शिक्षा विभाग मॉडल स्कूलों को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की क्षमता विकसित करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार करना चाहता है। यहां विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ करियर चयन में भी सहायता मिलेगी। छात्रों को विषयों की समझ, परीक्षा की तैयारी और आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना है।
मिलेगा करियर चुनने का मौका
इस पहल से छात्रों को कम उम्र में ही अपनी रुचि और क्षमता पहचानने में मदद मिलेगी। जो विद्यार्थी डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें शुरुआती स्तर से तैयारी का माहौल मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से बिहार के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलेंगे और राज्य में शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा।

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