पहले जारी आदेश में यह व्यवस्था थी कि यदि पति-पत्नी दोनों परिषदीय स्कूलों में शिक्षक हैं और उनमें से कोई एक ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है तो छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के आधार पर किसी एक का तबादला किया जा सकता है। इस नियम को लेकर शिक्षकों में यह भ्रम था कि क्या दोनों को एक ही जिले या आसपास के क्षेत्र में तैनाती मिल पाएगी या नहीं। अब शासन ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
ऑनलाइन आवेदन करने वाले शिक्षक को ही मिलेगा मौका
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, अंतरजनपदीय तबादले में उसी शिक्षक का आवेदन मान्य होगा, जिसने स्वयं प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। यदि पति या पत्नी में से किसी ने आवेदन नहीं किया है तो उसका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इस फैसले से तबादला प्रक्रिया को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की उम्मीद है।
छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर होगा फैसला
सरकार ने विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए कुछ मानक तय किए हैं। इनमें पति-पत्नी शिक्षक श्रेणी को भी शामिल किया गया है। तबादले की प्रक्रिया में जिलों के छात्र-शिक्षक अनुपात यानी PTR को भी ध्यान में रखा जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों का PTR आंकड़ा जारी कर दिया गया है, जिससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन जिलों में शिक्षकों की जरूरत ज्यादा है।
प्रदेश में औसतन एक शिक्षक पर 31 छात्र
आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक कार्यरत हैं। राज्य का औसत छात्र-शिक्षक अनुपात 31 है, यानी एक शिक्षक के जिम्मे औसतन 31 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है। कुछ जिलों में यह अनुपात काफी ज्यादा है। श्रावस्ती और बहराइच जैसे जिलों में छात्रों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों का अनुपात अधिक दर्ज किया गया है, जबकि कुछ जिलों में यह काफी कम है।
शिक्षकों ने किया तबादले के लिए आवेदन
विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरजनपदीय तबादले के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों ने आवेदन किया है। इनमें पति-पत्नी शिक्षक और दिव्यांग श्रेणी के आवेदकों की संख्या अधिक बताई जा रही है। वहीं कुछ अन्य विशेष श्रेणियों में आवेदन अपेक्षाकृत कम हैं। शासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तय नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

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